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स्वतंत्रता के इतिहास में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के योगदान को शब्दों में वर्णित करना असंभव – मोहित मदनलाल ग्रोवर

पढ़े-लिखे समाज को बदले की नहीं बदलने की बात करनी चाहिए, ऐसा बदलाव जिसमें हर वर्ग खुशहाल हो

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गुरुग्राम : “स्वतंत्रता के इतिहास में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की वीरता व योगदान को शब्दों में वर्णित करना असंभव है। देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने की उनकी तड़प और बलिदान को याद करके आज भी हर भारतवासी की आंखें नम हो जाती है, ऐसे वीर योद्धा के चरणों में कोटि-कोटि नमन”
उक्त विचार शहीद दिवस के अवसर पर प्रसिद्ध समाजसेवी एवं युवा नेता मोहित मदनलाल ग्रोवर ने महान शहीदों की याद में आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान रखे। उन्होंने कहा कि 23 मार्च 1931, यह आज का ही दिन था जब अंग्रेजी हुकूमत ने मां भारती के लाडले सपूतों, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को एक साथ फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था और यह तारीख इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गयी।
अपने हौसले, हिम्मत और देशप्रेम से ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ें हिला देने वाले अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने तब ‘पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल’ के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी की सजा दे दी गई। आज पूरा देश भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को याद कर रहा है। मातृभूमि के लिए उनका त्याग समस्त देशवासियों के लिए आदर्श है।
मोहित ग्रोवर ने आगे कहा कि हमारे महान क्रांतिकारियों का मानना था कि यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा। उनका ध्येय बम गिराकर किसी को मारना नहीं था बल्कि ये सन्देश देना था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और हमें आज़ाद करना चहिये। आज राजनीति के बदलते परिवेश और दोहरी मानसिकता पर मोहित मदनलाल ग्रोवर ने कहा कि पढ़े-लिखे समाज को बदले की नहीं बदलने की बात करनी चाहिए, ऐसा बदलाव जिसमें हर वर्ग खुशहाल हो।
मोहित ग्रोवर ने कहा कि ऐसा विकास किस काम का जिसकी नींव ही कमजोर हो। उन्होंने युवाओं को सन्देश देते हुए कहा कि देश पर कुर्बान होने वाले यह शूरवीर देश के असली हीरो थे जो हमारे दिलों में हमेशा बसे रहेंगे। युवाओं को इन देशभक्तों के बलिदान से प्रेरणा लेते हुए देश की तरक्की के लिए हमेशा आगे आना चाहिए।

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