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मात्स्यिकी को उभरते हुए क्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई है और यह सेक्टर 2014-15 से दो अंकों में 10.87 प्रतिशत की शानदार औसत वार्षिक वृद्धि प्रदर्शित करता आ रहा है। मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2019-20 में 142 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और इसमें विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं। इस सेक्टर ने भारत में 2.8 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान की है। विशेषकर सीमान्त और संवदेनशील समूहों के लिए तथा सार्थक सामाजिक-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में इसने योगदान दिया है। राष्ट्र निर्माण में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए मत्स्यपालन,पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने इस क्षेत्र के महत्वाकांक्षी विस्तार और त्वरित विकास के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव द्वारा आज बजट संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया गया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपने बजट भाषण में मत्स्य पालन विभाग को 1220.84 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है जो कि विभाग को अब तक का सर्वाधिक बजटीय समर्थन है। यह वित्त वर्ष 2020-21 के बजट की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इसके अतिरिक्त इसमें विभाग की फ्लैगशिप योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 1000 करोड़ रुपये का आवंटन शामिल है जो कि वित्त वर्ष 2020-21 के मुकाबले 43 प्रतिशत बढ़ाया गया है।

वित्त मंत्री ने आधुनिक मात्स्यिकी बंदरगाहों और फिश लैंडिंग सेन्टर के विकास के लिए पर्याप्त निवेश की घोषणा की है। आरंभिक तौर पर पांच प्रमुख मात्स्यिकी बंदरगाह – कोच्चि, चेन्नई, विशाखापत्तनम, पारादीप और पेटुआघाट को आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा नदियों और जलमार्गों के किनारे भी अंतर्देशीय मात्स्यिकी बंदरगाहों और फिशिंग लैंडिंग सेन्टर विकसित किए जाएंगे। यह स्वागत योग्य घोषणा है क्योंकि मात्स्यिकी बंदरगाह और फिशिंग लैंडिंग सेन्टर नीली क्रान्ति और मत्स्य कारोबार के विकास का केन्द्र हैं और मत्स्य पालकों तथा तटीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास से बहुत करीब से जुड़े हैं। मछलियों की गुणवत्ता और निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि के मकसद से पांच मात्स्यिकी बंदरगाह और लैंडिंग सेन्टर को आधुनिक अवसंरचना और सुविधाओं,संपूर्ण श्रृंखला तैयार करने,अनवरत शीत श्रृंखला और हायजिनिक तरीके से काम के तरीकों के लिए उन्नत और आधुनिक बनाया जाएगा जिससे 40 हजार मत्स्य पालकों को लाभ होगा। विशिष्ट आर्थिक प्रक्षेत्रों (ईईजेड) और अंतराष्ट्रीय समुद्र क्षेत्र की संभावनाओं का भरपूर दोहन करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी के गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले आधुनिक सहायक सुविधाओं से युक्त जहाज भी आरंभ किए जाएंगे जिससे कि मत्स्यपालकों और अन्य हितधारकों की आय को दोगुना किया जा सके। इससे मात्स्यिकी बंदरगाहों और लैंडिग सेन्टर से संबद्ध मत्स्य पालकों, कामगारों और मत्स्य विक्रेताओं का पंजीयन करने और मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) के रूप में उनके समूह गठित करने में भी मदद मिलेगी।

वित्त मंत्री ने अपनी घोषणा में अंतर्देशीय मात्स्यिकी के विकास पर भी जोर दिया और मात्स्यिकी सेक्टर के इतिहास में पहली बार नदियों और जलमार्गों के किनारों पर बंदरगाह और लैंडिंग सेन्टर का निर्माण किया जाएगा। नदी तटों के मात्स्यिकी बंदरगाह और लैंडिंग सेन्टर पहले उल्लेखित लाभों के अतिरिक्त अंतर्देशीय मात्स्यिकी सेक्टर को संगठित करने में भी मददगार होंगे। अभी तक यह क्षेत्र गैर संगठित है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सीवीड फार्मिंग उभरता हुआ सेक्टर है जिसमें तटीय समुदायों के लोगों के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता है और व्यापक पैमाने पर रोजगार तथा अतिरिक्त आय प्रदान कर सकता है। सीवीड उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बहुउद्देश्यीय सीवीड पार्क तमिलनाडु में स्थापित किया जाएगा। भारत में 22 लाख वर्ग किमी ईईजेड क्षे़त्र है और 0.53 वर्ग किमी महाद्वीपीय जलसीमा है जिसमें सीवीड उत्पादन और स्वदेशी सीवीड आधारित उद्योगों जैसे कि मूल्य वर्धक उत्पाद,पौष्टिक औषधि,जैविक ईंधन,जैविक प्लास्टिक इत्यादि के विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं जो विश्व बाजार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त सीवीड फार्मिंग में 1.5 करोड़ लोगों विशेषकर तटीय महिला मत्स्य पालकों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने की क्षमता है। यह वर्ग पिछले कुछ दशकों से प्राकृतिक सीवीड संग्रहण से जुड़ा रहा है। माननीय वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा से सीवीड उत्पादन में वृद्धि को गति मिलेगी और तटीय समुदायों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। तमिलनाडु में 100 करोड़ रुपये के निवेश से सीवीड पार्क को संपूर्ण सीवीड मूल्य श्रृंखला के लिए वन स्टॉप पार्क की तरह एक केन्द्र के तौर पर विकसित किया जाएगा जिसमें उत्पादन-पूर्व और उत्पादन-बाद की अवसंरचना, लॉजिस्टिक, विपणन, निर्यात प्रोत्साहन, नवेान्मेष, टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन और जानकारी के प्रसार तक सभी गतिविधियों को संबद्ध किया जाएगा जिससे कि अधिकतम उत्पादन हासिल किया जा सके और इस तरह से अधिकतम मूल्य वर्धन,न्यूनतम अवशिष्ट हो तथा सभी हितधारकों की आय में वृद्धि हो।

निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 में कृषि ऋण लक्ष्य बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये करने की भी घोषणा की जिससे हमारे किसानों को पर्याप्त ऋण सुविधा प्राप्त हो जिसमें पशुपालन,डेयरी और मत्स्य पालन को अधिक ऋण प्रदान करना सुनिश्चित किया जाएगा। यह मत्स्य पालकों और उत्पादकों को अधिक ऋण प्रवाह के पूर्व के प्रयासों जैसे कि मत्स्य पालन और पशुपालन के लिए एफआईडीएफ के अंतर्गत रियायती वित्त और किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा का विस्तार करने की योजनाओं को और बल प्रदान करेगा। यह न केवल सेक्टर के विकास को उत्प्रेरित करेगा बल्कि इससे लघु और सीमान्त मत्स्य कर्मचारियों और मत्स्य क्षेत्र के लघु उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी जो कि कोरोना महामारी के कारण कार्यशील पूंजी कम हो जाने के कारण संकट का सामना कर रहा है। इससे इस क्षेत्र में उद्यमिता को बल मिलेगा, प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर और मत्स्य पालन को व्यवसाय के तौर पर अपनाकर आजीविका का साधन बनाने में मदद मिलेगी और इस तरह से वित्तीय समावेशन का विस्तार होगा।

वित्त मंत्री की घोषणाएं जिम्मेदार, सतत और समानतापूर्ण ढंग से समुदायों पर प्रभाव डालने और इस सेक्टर के विकास को उत्प्रेरित करने की दिशा में हैं।

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