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Thursday, October 22, 2020

कोरोना महामारी में बिजनेस चलाना चुनौती, हार ना मानें: नवीन जिंदल

अपने बिजनेस को दूसरों के भरोसे पर ना छोड़ें

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गुरुग्राम। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के चेयरमैन एवं पूर्व सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि यह सही है कि कोरोना महामारी के दौर में बिजनेस चलाना चुनौती हो गया है। फिर भी हार ना मानें और अपने बिजनेस को गति देते रहें। जो लोग बिजनेस बदलने की सोच रहे हैं, वे अपने क्षेत्र की मांग, पर्यावरण व अन्य सभी बारीकियों को देखकर यह काम करें।
यह बात उन्होंने रविवार को अग्रवाल वैश्य समाज की ओर से ऑपोरच्र्यूनिटीज फॉर आंत्रप्रयोनर्स इन करंट सिचुएशन यानी वर्तमान स्थिति में उद्योगपतियों के लिए अवसर पर आयोजित अग्रवाल वैश्य समाज की ओर से वेबीनार में कही। नवीन जिंदल ने कहा कि बिजनेसमैन को सबसे पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि वह कर्ज कम से कम ले। अगर लिया है तो उसे समय से चुकता करें, ताकि उसके बिजनेस पर उंगली ना उठे। कर्ज के साथ-साथ टैक्स को ईमानदारी से भरे। नहीं तो उसके बिजनेस में अनेक बाधाएं आएंगी। देश में रिश्वतखोरी से सब वाकिफ हैं और बिजनेसमैन, व्यापारी को नेता, अफसर रिश्वत देने के लिए मजबूर करते हैं। जब भी सरकार से कोई डील की जाती है तो अफसरों की लॉटरी लग जाती है। इसके साथ ही अपने बिजनेस को पहले खुद पूरी तरह से समझें। हर बारीकी पर नजर रखें। दूसरों के भरोसे ना छोड़ें।
नवीन जिंदल ने कहा कि चीन ने पूरी दुनिया के बिजनेस को तबाह कर दिया है। पूरी इकॉनोमी को धरातल पर ला दिया है। कोरोना के जनक चीन ने यहां तक कि हमारे जवानों को भी धोखे से मारा। भारत सरकार का यह निर्णय यही है कि उसे आर्थिक मार दी जाए। सबसे बड़ा हमला बिजनेस का हो सकता है।
गुरुग्राम इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेएन मंगला द्वारा पूछे गए सवाल कि नेता सरकार बनने से पहले कुछ बोलते हैं और बाद में अलग भाषा बोलते हैं, इसके जवाब में नवीन जिंदल ने कहा कि हमारे देश की बदकिस्मती यही है कि यहां पर 90 प्रतिशत नेता खराब ही हैं और 10 प्रतिशत अच्छे। ये 90 प्रतिशत व्यापारियों का लाभ उठाते हैं। वे चाहते हैं कि व्यापारी टैक्स भी दे और उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ा भी रहे। जबकि विदेशों में यह सब नहीं होता। वहां व्यापारी, बिजनेसमैन को विशेष सम्मान मिलता है। व्यापारी चाहे कहीं का भी हो, उसे एकता बनाकर रखनी चाहिए। नेता हमारी फूट का फायदा उठाते हैं। अगर हम एक होंगे तो उनको भी समझ आ जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें सभी एक जैसी होती हैं, हमें खुद को ही समझना, संभलना पड़ेगा।
बाबू राम गुप्ता ने पूछा कि देश में बिजनेसमैन के साथ जो दुव्र्यहार होता है, उसके लिए जिम्मेदार नेता या अफसर हैं। इसके जवाब में नवीन जिंदल ने कहा कि इसके हम खुद जिम्मेदार हैं। हम एक हों तो कोई हमें झुका नहीं सकता।
सूरत से टैक्सटाइल के उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने पूछा कि लेबर पलायन कर गई है, ऐसे में क्या करें। उन्हें नवीन जिंदल ने सुझाव दिया कि ऐसी स्थिति में जो लेबर पलायन करके गई है, उससे हमें संपर्क बनाकर रखना है। उन्हें विश्वास दिलाना है कि उनको यहां पर कोई परेशानी नहीं होगी।
चेन्नई से बीएल स्टील के चेयरमैन एवं जेएसपीएल के तमिलनाडूू में पहले डिस्ट्रीब्यूटर अरुण गुप्ता के महंगे किराए के सवाल पर नवीन जिंदल ने कहा कि ट्रकों के जरिए माल बहुत ही महंगा पड़ता है। इसलिए इसे ट्रेनों, मालवाहक जहाजों से ले जाया जाए तो सही होगा। जहां पर यह संभव है, वहां उपयोग करें।
रोहतक से वरुण अग्रवाल द्वारा पूछे गए सवाल-देश में कोयले की माइंस को सरकार प्राइवेट हाथों में देने जा रही है। क्या यह जायज है। इसके जवाब में नवीन जिंदल ने कहा कि कोयले को हमारे देश में कोकीन बना रखा है। विश्व में कोयले के भंडारण में हम चौथे नंबर आते हैं। फिर भी हमें 40 प्रतिशत कोयल आयात करना पड़ता है। यह हमारा दुर्भागय है। कोयला हमारे चारों तरफ है। देश को आत्मनिर्भर बनाना है तो कोयला होना चाहिए। देश की तरक्की का रास्ता भी कोयले की खदानों से होकर जाता है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि कोल इंडिया का एकाधिकार अगर खत्म कर दिया जाता है तो यह अच्छा होगा। कोयले से हम गैस भी बना सकते हैं। साथ में पेट्रोल, डीजल व अन्य कई तरल पदार्थ बनाए जा सकते हैं।
वेबीनार के अंत में आयोजक अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि जो लोग वेबीनार में सीधे जुड़े, उनके अलावा करीब 15 हजार लोगों ने इसे फेसबुक पर लाइव भी सुना, देखा। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक और वेबीनार आयोजित किया जाएगा, ताकि सभी व्यापारियों की जिज्ञासाओं को शांत किया जा सके। अग्रवाल वैश्य समाज गुरुग्राम के गुडग़ांव पार्लियामेंट अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के संयोजक एडवोकेट अभय जैन ने और प्रोफेशनल विंग के अध्यक्ष एडवोकेट विभोर बंसल ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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