छींक को न रोकें, हो सकता है खतरनाक!

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कई लोगों की एक बात उन्होंने नोटिस की होगी कि वे छींक आने पर उन्हें दबा लेते हैं। उन लोगों को सार्वजनिक रूप से छींकना सही नहीं लगता है। उन्हें लगता है कि उनकी छींक से आस-पास के लोगों के सामने क्या इम्प्रेशन पड़ेगा। मीटिंग में हों या किसी भरी सभा में, छींक को रोकना या दबाना खतरनाक हो सकता है।

जानकारों की मानें तो यह तो आप जानते होंगे कि छींक आना एक नैचुरल प्रोसेस है और अगर आपको छींक आती है तो समझ जाईये कि आप स्वस्थ्य हैं, लेकिन अगर इसे दबायेंगे तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वास्तव में जब कोई बाहरी तत्व हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा होता है तो हमें छींक आ जाती है और वो संक्रामक चीज बाहर ही रह जाती है।

इसी तरह जानकारों का कहना है कि छींक के कारण नाक से 160 किलोमीटर प्रति घण्टा की गति से हवा निकलती है। छींक को रोकते हैं तो यह दबाव शरीर के अन्य अंगों की ओर चला जाता है जिसके कारण ईयरड्रम फट सकता है और आपको सुनायी देना बंद हो सकता है।

जानकारों की मानें तो छींक शरीर में प्रवेश करने वाले कई हानिकारक बैक्टीरिया को रोकने का काम भी करती है। यदि आप अपनी छींक रोकते हैं तो ये रोगाणु शरीर के अंदर ही रह जाते हैं और बीमारी का कारण बनते हैं।

इसके साथ ही जानकारों का कहना है कि कई बार छींक रोकने की वजह से आँखों की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो जाती हैं। इसके अलावा गर्दन में भी मोच आ सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में दिल का दौरा आने की भी आशंका रहती ही है। छींक रोकने का प्रभाव ज्यादा हो तो दिमाग की नसों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

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