शीत ऋतु में ध्यान देने योग्य

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इस ऋतु में कटु, तिक्त व कषाय रसयुक्त एवं वातवर्धक पदार्थ, हल्के रूखे एवं अति शीतल पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। खटाई का अधिक प्रयोग न करें जिससे कफ का प्रकोप न हो और खाँसी, श्वास, दमा, नजला, जुकाम आदि व्याधियाँ न हों। ताजे दही, छाछ, नीँबू आदि का सेवन कर सकते हैं। भूख को मारना या समय पर भोजन न करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। आलस्य करना, दिन में सोना, देर रात तक जगना, अति ठंड सहन करना आदि शीत ऋतु में वर्जित हैं। बहुत ठंडे जल से स्नान नहीं करना चाहिए।

पूरे वर्ष में यही समय हमें मिलता है जब प्रकृति हमें स्वास्थ्य की रक्षा और वृद्धि करने में सहयोग देती है। अत: इस ऋतु में उचित आहार-विहार द्वारा अपने शरीर को पुष्ट और बलवान अवश्य बनाना चाहिए जिससे कि अन्य ऋतुओं में भी हमारा शरीर बलवान बना रह सके।

स्वास्थ्य की अनुपम कुंजियाँ

क्या आप जानते हैं कि, किसी भी प्रकार के रोग में मौन रहना लाभदायक है। इससे स्वास्थ्य सुधार में मदद मिलती है। औषधि-सेवन के साथ मौन का अवलम्बन हितकारी है। रात्रि 10 बजे से प्रात: 4 बजे तक की गाढ़ निद्रा से ही आधे रोग ठीक हो जाते हैं। अर्धरोग हरि निद्रा।

बिना भूख के खाना रोगों को आमंत्रित करना है। कोई कितना भी आग्रह करे या आतिथ्यवश खिलाना चाहे पर आप सावधान रहें। पेट पर अन्याय न करें। खिलाने वाला भले अविवेकपूर्वक या रागवश खिलाना चाहे पर ध्यान रहे की पेट आपका है। पचाना आपको है।

एक बार किया हुआ भोजन जब तक पूरी तरह पच न जाये एवं खुलकर भूख न लगे तब तक भोजन करें। कोई भी पेय पीना हो तो इड़ा नाड़ी अर्थात् नाक का बाँया स्वर चालू होना चाहिए। यदि दाँया स्वर चालू हो और पेय पदार्थ पीना आवश्यक जान पड़े तो दाँया नथुना दबाकर बाँये नथुने से श्वास लेते हुए पीयें।

भोजन या कोई भी खाद्य पदार्थ सेवन करते समय पिंगला नाड़ी अर्थात् सूर्य स्वर चालू रहना हितकर है। यदि न हो तो थोड़ी देर दाँयी करवट लेटकर या कपड़े की छोटी पोटली बाँयीं काँख में दबाकर स्वर चालू किया जा सकता है।

चाय या कॉफी प्रात: खाली पेट कभी न पीयें। दुश्मन को भी न पिलायें। एक सप्ताह से अधिक पुराने आटे का उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं है। सूर्याेदय के बाद तक बिस्तर पर पड़े रहना अपने स्वास्थ्य की कब्र खोदना है।

प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाना, सुबह शाम खुली हवा में टहलना स्वास्थ्य की कुंजी है। दीघार्यु व स्वस्थ जीवन के लिए प्रात: कम-से-कम 5 मिनट तक लगातार तेज दौड़ना या चलना तथा कम से कम 15 मिनट नियमित योगासन करना चाहिए।

भोजन कम-से-कम 20-25 मिनट तक खूब चबा-चबाकर एवं उत्तर या पूर्वाभिमुख होकर करें। जल्दी या अच्छी तरह चबाये बिना भोजन करने वाले चिड़चिड़े व क्रोधी स्वभाव के हो जाते हैं।

(साई फीचर्स)

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