बजट के आंकडो पर खेला जा रहा खेल : राठी

बढ़ी हुई आय दिखाकर प्रस्तावित बजट में 2605 करोड़ आय तो खर्चा 2190 करोड़ वास्तविता में 2019-20 मे 1300 करोड़ से उपर नहीं हो सकती निगम की वार्षिक आय : राठी

0
152

नगर निगम गुरुग्राम के 2019-20 के बजट स्वीकृति के लिए बुलाई गई बैठक के दौरान वार्ड 34 के पार्षद आरएस राठी ने फिर निगम अधिकारियों को घेरा। राठी का कहना है कि विभिन्न स्त्रोतो से 2019-20 में लगभग 2605 करोड़ रुपये की आमदनी दिखाई गई है लेकिन यह आय जरूरत से ज्यादा है जो पूरे वित्तीय वर्ष में कमाना संभव नहीं है। इसी आमदनी के हिसाब से 2190 करोड़ रुपये के खर्चे भी दिखाए गए है।
राठी ने कहा कि वित्तीय वर्ष में 2018-19 में भी निगम ने आय 2250 करोड़ दिखाई थी और खर्चा 1800 करोड़ रुपये लेकिन वित्तीय वर्ष खत्म होने तक उनके दावे पूरी तरह से सही साबित हुए। उन्होंने दावा किया था कि निगम किसी भी सूरत में 958 करोड़ रुपये से अधिक नहीं कमा सकता और वास्तविकता में आय भी 868 करोड़ रुपये हुई। इसी प्रकार खर्चे निगम ने 1800 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट किए थे और हुए मात्र 543 करोड़ रुपये।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की भांति इस बार भी निगम ने जबरदस्ती बढ़ा-चढ़ाकर आय और खर्चे प्रोजेक्ट किए हुए है। पिछली बार भी मैने यह प्रश्न उठाया था कि बजट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने से यदि किसी वित्तीय वर्ष में आय नहीं होती और खर्चे करने पड़े तो आकंडो में निगम का कोरपस प्रभावित हो सकता है।
निगम ने स्टांप डयूटी से पिछला बकाया मिलाकर 900 करोड़ रुपये आमदनी प्रोजेक्ट की हुई है जबकि सरकार कभी भी इतना पैसा एक साल में रिलीज नहीं कर सकती। पिछले कुछ सालों की औसत निकाली जाए तो निगम को 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं मिला। इसी तरह के काल्पनिक आंकडों में रहकर निगम हवा से भरा गुब्बारे की भांति बजट प्रस्तुत करता है।
इसी प्रकार विज्ञापन कर के तौर पर 35 करोड़, एक्साइज डयूटी एवं बिजली टैक्स के तौर पर 226 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट किए है जबकि आज तक विभाग बिजली टैक्स के नाम पर एक पैसा नहीं ले सका और इस बार सीधा 177 करोड़ प्रोजेक्ट किए हुए है जो कि सपना देखने के बराबर है। पिछले बजट में डिस्पोजल ऑफ फिक्सड एसेट्स का कोई हेड नहीं था और इस बार सीधा 523 करोड़ रुपये आय प्रोजेक्ट की हुई है। यह भी कतई संभव नहीं है। इसी प्रकार 2190 करोड़ रुपये के खर्चो में भी निगम ने 700 करोड़ रुपये से अधिक के खर्चे दर्शाये हुए है।

बजट में निगम ने कैपिटल रिसीट (पूंजी प्राप्ति) लगभग 414 करोड़ और पूंजी खर्चा 1065 करोड़ दर्शाया जबकि लेखा-जोखा सिद्वांत के अनुसार पूंजी खर्चा, पूंजी प्राप्ति से अधिक नहीं हो सकता। हालांकि यहां पर निगम ने अपनी गल्ती मान ली और इसे ठीक करने का आश्वासन दिया।

राठी ने वरिष्ठ नागरिकों के संबंध में सुझाव देते हुए कहा कि निगम को ऐसे लोगों की सूची बद्व कर उनकी व उनके घर की देख-रेख करनी चाहिए ताकि भविष्य में मृत्यु से पहले अपनी संपत्तियां निगम को दे सके। इसके अलावा जीएमडीए को दिए गए 550 करोड़ रुपये पर भी उन्होंने कहा कि फरीदाबाद निगम की भांति इसे भी निगम के रिकार्ड में लोन दर्शाना चाहिए।

LEAVE A REPLY