ज्योतिष क्या है? और इसका महत्व क्या है?

मात्र धन कमाने का ज़रिया नहीं है ज्योतिष

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रेणु श्रीवास्तवा

ज्योतिष एक शास्त्र है जो सामुद्रिक शास्त्र से निकाल गया एक शास्त्र है। वैसे समुद्रिक शास्त्र मे अनेक शास्त्र सम्मलित है। हस्तरेखा शास्त्र, नाड़ी, ज्योतिष हमारे देश मे वेदिक शास्त्र है। जो काफी पुराना और प्रसिद्ध है, इसकी उत्पत्ति श्री गणेश जी ने अपने हाथो से लिख कर की थी। जिसे कार्तिकय ने समुद्र में फेक दिया। फिर विष्णु जी ने इसे बाहर निकाला। तीन बार लगातार ऐसा हुआ। अंत मे ऋषि सामुद्र ने इसे प्रस्तुत किया।

प्रारम्भ मे ये मनुष्यो की भविष्य, भूत तथा वर्तमान जीवन के बारे मे जानने के लिए लिखा गया था। शारीरिक सारंचना के आधार पर, चिन्हो के द्वारा किसी भी मनुष्य के जीवन में होने वाली घटनाओं की जानकारी इसके द्वारा प्राप्त की जा सकती थी। परंतु मनुष्यों को इसकी भाषा की पूर्ण जानकारी ना होने के कारण ज्यादा विस्तार नहीं हो सका, इसीलिए ज़्यादातर ज्योतिष “चिकित्सा” के उद्देश्य से इसका उपयोग करते थे। कोई बीमारी तथा शरीर मे होने वाले परिवर्तन और विकारो की जानकारी ज्योतिष द्वारा दी जाने लगी। फिर विदेश लोग भारत से इस विधा को ग्रहण करके गए। जिन्होने  इसको स्वरूप बड़ा दिया।

ये भी कहा जाता है की ये विध्या ब्रह्मा जी से नारद जी को मिली। नारद जी ने ये ज्ञान शोनक आदि ऋषियों को दिया। उन ऋषियों से ये विध्या ‘प्राशर ऋषि’ को मिली।

आधुनिक युग मे ज्योतिष लोगी के लिए शादी-विवाह, मुहूर्त, व्यापार, धन लाभ -हानि, समस्याएँ तथा जन्म-मरण तक ही सीमित रहा। कुछ लोग इस पर विश्वास करते थे तो कुछ लोग नहीं। या फिर सहमत नहीं होते थे। परंतु आज इसका विस्तार बढ़ गया है। अधिकतर लोग इस विध्या की और आकर्षित हो रहे है। तथा विश्वास भी कर रहे है। इसको जानने की जिज्ञासा लोगो मे बढ्ने लगी है। इसका कारण ये है कि अब ज्योतिष कुछ सीमित बातों की जानकारी ही नहीं देता बल्कि ‘तीन जन्मो’ के बारे मे हमें इसके द्वारा जानकारी मिल सकती है। पिछला जन्म, वर्तमान और आने वाला जन्म जो हम इस जन्म को भोगने के बाद प्राप्त करेंगे। ज्योतिष में हम आने वाले जीवन की अधिकतर घटनाओं और दुर्घटनाओं के बारे में आसानी से जान सकते है और उनका समाधान भी सही समय रहते कर सकते है।

कई बार लोगो द्वारा ये सुनने मे आता है कि ज्योतिष एक अंधविश्वास है। जो लोगो को मार्ग से भटकाता है, जबकि ऐसा नहीं है। इसका सही अर्थ ये है “कि यदि हमारी कुंडली कोई दुर्घटना को दर्शाती है और हम यदि इसका ग्रहो के अनुसार कोई (मंत्र, मंत्रो द्वारा) इसका उपाय करें तो होनी तो हो कर रहेगी इसे हम अनदेखा नहीं कर सकते परंतु जो दुर्घटना किसी भरी वहाँ से होने वाली थी वो एक छोटी दुर्घटना मे बदल जाएगी। जो हमें अधिक होने वाले नुकसान से बचा लेगी। ज्योतिष मे हमारे जीवन मे हमारे कर्मो के फल से होने वाले या ये कहें कि मिलने वाले क्या परिणाम हो सकते है उसका ब्योरा देने मे सरथ है। यहाँ तक कि हम इस जीवन मे यदि सुखी है या दुखी है तो इसका कारण क्या है , प्रारम्भ मे हमें हमें क्या मिला क्या नहीं यहीं सब ज्योतिष ही हमें बताता है। ये एक मानव विज्ञान की तरह है जो हमारे मन, दिमाग, सारंचना, ज्ञान-क्षमता, एवं हमारे सदकर्म आदि सभी की कुंजी है।

इसका महत्व आज इतना व्यापक हो रहा है कि हर कोई अपने जीवन के बारे मे जानने के लिए उत्सुक रहता है, और विदेशी लोग भी इसकी और खिचें चले आ रहे है। मगर ये कहना भी गलत नही होगा कि कई लोग इस महान विध्या का गलत उपयोग करके धन बटोरने मे लगे है जो बिलकुल सही नहीं है। लेखिक यदि कोई सच मे इस विध्या का ज्ञानी है तो वो इसको कभी अधर्म की और नहीं ले जाएगा। ये वहीं लोग है जिनहे अधूरा ज्ञान प्राप्त है और उन्हे कर्मो की जानकारी नहीं हैं वो धन कमाने मे अंधे हो चुके है। खैर… फिर भी यदि इस विध्या का कोई सही ज्ञानी है तो वो इसका प्रचार करेंगा और भटके हुये लोगो का मार्गदर्शन करेगा। इसको एक व्यवसाय ना मानकर यदि सद्क्र्मो मे लगाया जाये तो इसका फल अपने आप ही लोगो को मिलेगा। ज्ञानी को कभी धन की लालसा नहीं रहती जबकि अज्ञानी इसे कमाई का ज़रिया मानते है। ये एक लोगे के जल के समान ही प्राप्त है जो समुन्द्र के समान है जिसकी गहराई बहुत गहरी है ज्ञान का भंडार भरा है इस गहराई मे हमें कोशिश करनी है इसको अधिक से अधिक प्राप्त करने की।

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