नमो एप से जीतेंगे मोदी!

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PIC CREDIT: NewsBytes

||हरि शंकर व्यास||

हां, मैं यदि लिखता हूं कि नरेंद्र मोदी अनिवार्यतः मई 2019 में फिर शपथ लेगे तो उसके पीछे दस तरह के वे नुस्खे है जिन पर न विरोधियों का ध्यान है और न तैयारी है। मोदी-शाह सब तरह के नुस्खे लिए हुए हैं। एक-तरफ  हिंदू-मुस्लिम जैसे भावनात्मक मसले तो दूसरी और बीस-तीस करोड़ मतदाताओं की मुठ्ठी में नमो एप नाम की गीता को स्थापित कराना। इससे विष्णु भगवान के अवतारी राजा नरेंद्र मोदी घर-परिवार के पचास करोड़ लोगों को व्रजाशन, योग सीखाएगें तो हर रोज असंख्य बातों से हर घर में नमो एपमय स्मार्टफोन के जरिए मतदाताओं में स्वंयस्फूर्त यह भाव बनवाएगें कि भला कौन है नरेंद्र मोदी जैसा! भूले जात-पात को और सुने-देखे अपने नरेंद्र मोदी के श्रीमुख उर्फ नमो एप से बह्राणड, विश्व, विकास की झांकी को। झांकी जो मनमोहक है, पुरषार्थी है, शौर्यपूर्ण है. कर्मण्यएं वाधिकारस्ते है।…

मत सोचिए मेरा यह लिखना बेतुका है। इस मामले में अभी मैं दूसरा पक्ष नहीं लिखूंगा, नहीं बताऊगा। फिलहाल इतना भर नोट करके ( विपक्षी नेता खास तौर पर) रखंे कि 2019 का लोकसभा चुनाव वैश्विक पैमाने का दुनिया का नंबर एक वह सुपरटेक चुनाव होना है जिसमें नमों एप से नरेंद्र मोदी सुनामी निकालने का विश्व रिकार्ड बनाएंगे! विपक्ष और विरोधी, मीडिया जांत-पांत- आर्थिक तकलीफों के हिसाब में गलतफहमी में रहेगें और नरेंद्र मोदी दलित, पिछड़े, फारवर्ड सबके नौजवान मतदाताओं में उनकी भाषा में उनकी पसंद की झांकी दिखलाते हुए यह विश्वास पैठाए हुए होंगे कि मैं हूं न! मैं हूं तो विकास हैं! तेज रफ्तार विकास है! चौतरफा विकास है!

मैं हूं! मैं ईमानदार हूं! मैं बिना दाग के! मैं चौबीस घंटे काम करता हुआ! मैं योग करता हुआ! मैं दुनिया के नेताओं का प्रिय! येदियुरप्पा को मत देखों, शिवराज सिंह को मत देखों, वसुंधरा राजे को मत देखों, योगी आदित्यनाथ को मत देखों! मैं हूं मुझे देखों। मैं तय करूंगा। मैं बदलूगा। मैं हू तो मेरे सीएम, एमपी, एमएलए को ले कर मत सोचों। उन्हंे नहीं मुझे वोट देना है! देखों, पढ़ों, पढ़ाओं, फैलाओं मेरी गीता (नमो एप) और उसके संदेशों को। सब दुखों का हरण है इसमें। सैकड़ों साल की तपस्या के बाद हिंदुओं को ऐसा कर्मयोगी मिला है जो सोता नहीं, जो महाभारत करवा कर भी योगी श्रीकृष्ण की तरह सबसे अलग, सबसे परे अपनी मूर्ति को अक्षुण्ण रखे हुए है। मैं हूं वक्त! मैं हूं ईश्वर अवतार! मैं ही हू हिंदू भाग्य विधाता!

उफ! मैं लिखने की रौं में कहां से कहां चला गया। पर मुझे पता है कितने सौ लोगों, कितने सौ करोड़ रुपयों और दसियों तरह के जतनों से 2019 के लिए नमो एप तैयार हो रहा है। इसका उपयोग टेस्टींग स्तर पर शुरू हो गया है। इसी सप्ताह नमो एप से नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में भाजपा के उम्मीदवारों, पदाधिकारियों, विधायकों से बात की। उन्हंे बताया, गुरू मंत्र दिए कि कैसे चुनाव लड़ना है। मतलब यह प्रयोग हुआ कि बिना कर्नाटक गए भी असंख्य भाजपाईयों को नरेंद्र मोदी ने लाइव संवाद से मोहित किया। बहुत बारीकि से पार्टीजनों को, संगठन को समझाया कि येदियुरप्पा को ले कर ज्यादा न सोचे। जनता में बताएं मैं हू न! मतलब वोट नरेंद्र मोदी को होगा और जरूरी नहीं कि वे येदियुरप्पा को ही मुख्यमंत्री बनाएं।

इससे पहले नमों एप से ही आंबेडकर जयंती पर ग्राम स्वराज अभियान लांच करते हुए नरेंद्र मोदी ने पूरे देश के अपने सांसदों, विधायकों, कार्यकर्ताओं से वीडियो डॉयलाग बनाया। छह अप्रैल को भाजपा स्थापना दिवस पर नरेंद्र मोदी नमो एप के सोशल बज पर टिवटर से कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाया।

यह शुरूआत है। नमो एप का असली उपयोग मध्यप्रदेश, राजस्थान के चुनावों के बाद होना है। मूल मकसद लोकसभा चुनाव है। कर्नाटक में अभी उपयोग में यह न सोचे कि यदि वहां भाजपा हार गई तो नमो एप फेल। नहीं, विधानसभा चुनावों में उपयोग होने के बावजूद चुनाव हारना और लोकसभा चुनाव में नमो के असली रूप, उपयोग में दिन-रात का फर्क होगा। अभी नमो एप से पार्टी का टेकआवर, पार्टीजनों से डायल़ाग है। मतलब संगठन मंत्री रामलाल या प्रदेश अध्यक्षों, पदाधिकारियों का बीच अभी खत्म किया जा रहा है। सीधे हर लेवल, हर स्टेज पर नरेंद्र मोदी कार्यकर्ता, जनता को अपना निर्देश, गुरू मंत्र, तौर-तरीके बताएगें। इसी के जरिए जिला स्तर मतलब सांसद की हर सीट वहा का स्थानिय घोषणापत्र, वायदा पत्र बनवाया जाएगा। जिला ईकाईयों से जो फीडबैक मिलेगा, संवाद होगा उसी से (सर्वे टीमों की फीडबैक के साथ) टिकट तय होंगे। हौड बना दी गई है कि जो नमो एप को लोगों के बीच ज्यादा डाउनलोड कराएगा उसे टिकट मिलेगा। (यों इस बात को अलग तरह से कहां गया है पर हकीकत है कि जैसे पहले मोदी की सभाओं में उम्मीदवारों के लिए भीड़ लिवाने की कसौटी थी वैसे अब नमो एप डाउनलोड कराने को कसौटी बनाया जा रहा है।)

मतलब असली खेल, असली उपयोग विधानसभा चुनावों के बाद है। मोदी-शाह की टीम का टारगेट है कि 50 करोड़ लोगों के परिवारों को फोकस करते हुए हर परिवार के एक हाथ में एंडियोड फोन में नमो एप डलवा कर, अपलोड करवा कर यूजर की सुबह-शाम यह आदत बनवानी है कि मोदी ने आज फलां आसन किया, फलां खाया तो यूजर भी वहीं करें। सुबह-सुबह गीता के पाठ की तरह मोदी का कोट लोगों को पहुंचे और उसका ध्यान कर वह दिन शुरू करें।

क्या ऐसा कोई विजन, सोच, औकात और चुनाव जीतने या नरेंद्र मोदी को हराने की धुन राहुल गांधी, अखिलेश, मायावती, शरद पवार, ममता बनर्जी आदि किसी में है?

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