रीते एटीएम पर सरकार ने दी सफाई

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वाय.के.पाण्‍डेय ||

नई दिल्ली (साई)। देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत की खबरें आने के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि कुछ इलाकों में नोटों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि सरकार ने देश में करंसी के हालात की समीक्षा की है। वित्त मंत्री ने कहा कि देश में जरूरत से ज्यादा नोट सर्कुलेशन में हैं और बैंकों में भी पर्याप्त नोट उपलब्ध हैं।

इधर, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि कुछ राज्यों में नोटों की पैदा हुई किल्लत तीन दिनों में खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कैस की किल्लत है, वहां दूसरे राज्यों के मुकाबले कम नोट पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत के मुताबिक राज्यों के बीच नोटों का उचित वितरण करने की दिशा में कदम उठा रही है।

शुक्ल ने कहा, ‘अभी हमारे पास 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये की कैश करंसी है। एक समस्या है कि कुछ राज्यों के पास कम करंसी है जबकि अन्य राज्यों के पास ज्यादा। सरकार ने राज्य स्तर पर समिति गठित की है। वहीं, आरबीआई ने भी नोटों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने के लिए कमिटी गठित की है।’ वित्त राज्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि जिन राज्यों में नोटों को कमी पड़ रही है, वहां तीन दिनों में नोटों की नई खेप पहुंचा दी जाएगी।

देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत की खबरें आने के बाद सरकार हरकत में आ चुकी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली, आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग और एसबीआई चेयरमैन रजनीश सिन्हा ने कैश की कमी के कई कारण गिनाए। आइए जानते हैं कि क्यों ATM सूखे हैं और बैंक खाली…

प्रस्तावित फाइनैंस रेजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (FRDI) बिल, 2017 की वजह से अफवाह उड़ी कि इस बिल के कानून का रूप ले लेने पर बैंकों में जमा किया पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकार की ओर से इसका खंडन करने के बावजूद लोग एटीएम से पैसे निकालने दौड़ पड़े।

पंजाब नैशनल बैंक की मुंबई शाखा से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों के लिए अवैध तरीके से जारी लेटर्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoU) की जानकारी सामने आने एवं कई अन्य कंपनियों के लोन वापस नहीं किए जाने की खबरों से भी लोगों के मन में डर पैदा हुआ कि बैंकिंग सिस्टम फेल हो रहा है। बैंकों से भरोसा उठने की वजह से लोग कैश डिपॉजिट करने से बचने लगे और पहले से जमा रकम भी निकालने लगे। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसी डर से लोग पैसे निकालने लगे।

एक सवाल के जवाब में आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने माना कि 2000 रुपये के नोटों की कमी आई है, लेकिन फिर से काला धन जमा होने की आशंका खारिज कर दी। उन्होंने कहा, ‘अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ नोट हैं। यह संख्या पर्याप्त से ज्यादा है। हमें भी पता है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में घटे हैं। इसकी कोई जांच तो नहीं कराई है। लेकिन, अनुमान यह है कि बड़े नोट जमा करने में आसानी होती है। इसलिए लोग बचत की रकम 2000 रुपये के नोटों में ही जमा कर रहे हैं।’

एटीएम खाली होने का एक कारण बैंक जमा में वृद्धि दर में गिरावट भी है। वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक डिपॉजिट ग्रोथ घटकर 6.7% पर आ गई जो साल 2016-17 के दौरान 15.3% रही थी। इसके उलट बैंकों से पैसे ज्यादा निकले। वित्त वर्ष 2016-17 में बैंक क्रेडिट में 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई थी जो 2017-18 में बढ़कर 10.3 प्रतिशत रही।

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश सिन्हा ने कहा है कि अचानक नोटों की कमी का कारण किसानों को भुगतान की रकम बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। एक विभाग इस तरह के मामलों पर नजर रखता है।

गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, ‘देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।’

गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, ‘देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।’

दरअसल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में बीते कई सप्ताह से जारी कैश की किल्लत + से उहापोह की स्थिति पैदा हो गई है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर नए नोट गए तो गए कहां? सवाल उठ रहा है कि क्या अब भी नोट कालेधन के कारोबारियों के कब्जे में चले गए हैं या रिजर्व बैंक ने ही नोटों की सप्लाई कम कर दी है?

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