सर्वोदय समाज सम्मेलन का संदेश

0
589

कुमार कृष्णन       

 

आजादी के बाद गांधीजी की योजना थी कि उनके द्वारा बनाई गई सब रचनात्मक संस्थाएं मिल जाएं और एक होकर सर्वोदय की दिशा में राष्ट्र का पुनर्निमाण करें। उन्होंने 2 फरवरी 1948 को सेवाग्राम में बैठक भी बुलायी थी, किंतु दो दिन पहले ही गांधीजी चल बसे तब विनोबाजी के मार्गदर्शन में मार्च 1948 में सर्व सेवा संघ की स्थापना महादेव भाई भवन, सेवाग्राम में हुई। साध्य एवं साधनों की शुद्धि के माध्यम से सत्य अहिंसा पर आधारित, जात-पांत एवं शोषण से मुक्त समाज की स्थापन के उद्देश्य को मानने वाले सेवकों का संगठन सर्वोदय समाज के नाम से विनोबाजी ने 1948 में बनाया। उसी सेवाग्राम की भूमि पर आयोजित दो दिनों के सर्वोदय समाज का अखिल भारतीय 47वां सम्मेलन में देश और दुनिया से आए गांधीवादियों ने यह माना कि भारत तथा विश्व में व्याप्त हिंसा,बेरोजगारी,असमानता और रंगभेद को दूर करने का रास्ता गांधी मार्ग ही है।यह माना कि सर्वोदय में युवाशक्ति आंदोलन के भविष्य के लिए आशा है। सम्मेलन में चालीस फीसदी से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया तथा भ्रष्टाचार,साम्प्रदायिकता, प्रदूषण आदि से मुक्त समानता के आधार पर काम करने का संकल्प लिया। इसके अतिरिक्त खादी ग्रामोद्योग,मद्य निषेघ,वनाधिकार,भूमि और खनन के मुद्दों,विस्थापन ग्राम स्वराज और लोकशक्ति जागृत करने का संकल्प लिया।

दो दिनों के सम्मेलन का उदघाटन करते हुए महात्मा गांधी के प्रपौत्र राजमोहन गांधी ने कहा गांधी आंबेडकर के विचारों ने देश को एक नई दिशा देने का कार्य किया है। आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से सभी को बराबरी का हक दिया है़ तो गांधीजी ने सभी को जोड़कर रखा था, लेकिन आज उनके आदर्शों को दरकिनार किया जा रहा है। देश में सामाजिक अन्याय बढ़ रहा है़ जिसे रोकने के लिए गांधी आंबेडकरवादियों ने एक मंच पर आने की आवश्यकता है। महात्माजी ने दक्षिण अफ्रिका से लौटने के बाद संकल्प लिया कि देश को बदलना है। आर्थिक, सामाजिक स्तर पर क्रांति करनी है। बापू ने अहिंसा के मार्ग से देश को आजादी है। किंतु आज देश की परिस्थिति विपरीत है। आज भी गांधी का झूठा इतिहास बताया जाता है। गांधी का नाम लेते हैं लेकिन उनका वास्तविक इतिहास नहीं बताया जाता है।गांधी को आधा मुसलमान बताकर नेहरू को उन्होंने प्रधानमंत्री बनवाया तथा सरदार पटेल को दरकिनार किया ऐसा बताया जाता है।

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए एसएन  सुब्बाराव ने कहा कि विदेश में गए हुए गांधीजी छात्र थे, लेकिन देश में लौटने के बाद वह महात्मा बने। उन्होंने बताया कि अपना कोई दुश्मन नहीं है।सांसद रामदास तडस ने कहा कि गांधीजी का विचार विशाल है। यह विचार आज के युवाओं को बताएं।सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी ने कहा कि दुर्माग्य यह है कि गांधी के मृत्यु के बाद  चिंतन करना छोड़ दिया है। सिर्फ गांघीवादी बने रहे,गांधी के विचारों पर चलनेवाले नहीं बने।गांधी ने खुद कहा था कि गांधीवाद नाम की कोई चीज नहीं है। जहां वाद होता है, वह चिपक जाता है। गांधी के विचार कब मेरे विचार होंगे,उस पर विचार करना होगा। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि मौजूदा दौर में पैसे के बदौलत चुनाव जीता जा रहा है। अपराधी जीतकर जा रहे हैं और वही शासन चला रहे हैं। भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के लिए यह शर्मनाक है। अन्याय का प्रतिकार होना चाहिए।

सम्मेलन में कस्तूरबा हेल्थ सोसाइटी केअध्यक्ष धीरूभाई मेहता, सर्वसेवा संघ के अध्यक्ष महादेव विद्रोही, आश्रम प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जयंत मठकर, उषा पंडित, शशि त्यागी,बालविजय, नयी तालिम के अध्यक्ष डा. सुगंठ बरंठ, राष्ट्रीय गांधी संग्राहलय के निदेशक अन्नामलाई, पूर्व सांसद रामजी सिंह, चंदन पाल,तपेश्वर भाई, प्रवीणा देसाई, आशा बोथरा, महेश शर्मा, मणिमाला, डा. अभय बंग, सम्मेलन के संयोजक आदित्य पटनायक, डा. मार्टिन लुथिंग (अमेरिका), फर्नाडों (मेक्सिको), वाहिम (थायलैंड), रॉबर्ट जनरल, प्रो. शंकर सन्याल, ए.पी. मेमन,  मा. म. गडकरी, सौरभ वाजपेयी, प्रकाश शाहा, टी़ आर.एन प्रभु के साथ बड़ी संख्या में तो गांधीवादियों ने हिस्सा लिया,लेकिन रामचंद्र राही, कुमार प्रशांत,शुभमूर्ति के साथ—साथ कई प्रमुख गांधीवादी नहीं दिखे।यह जाहिर करता है कि सर्वोदय जैसे आंदोलन में भी गुटबाजी है।

दो दिनों के सम्मेलन में देश के ज्वलंत सवालों, विकास मॉडल, संगठनों के काम करने के तरीके, किसानों के सवाल पर गहन चिंतन किया गया।किसानों के सवाल को रखते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि देश असाधारण कृषि संकट में फंसा हुआ है, जिसके चलते गत 20 वर्षों में साढ़े तीन लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं। आत्महत्या करने का प्रमुख कारण कर्जा होता है। कर्जा होने का प्रमुख कारण खेती में लगातार घाटा होना है।देश के 18 राज्यों में किसानों की औसत आमदनी 1700 रुपये है। सरकार तब भी उन्हें गरीब मानने को तैयार नहीं है। दुनिया में 120 रुपये प्रतिदिन से कम आय होने पर किसी भी व्यक्ति को अति गरीब माने जाने का प्रावधान है। लेकिन भारत सरकार उसकी अनदेखी कर रही है। सरकार यदि लक्ष्य पूरा भी करती है तो 3400 रुपये प्रतिमाह तक किसानों की आमदनी पहुंचेगी। जबकि जरूरत के हिसाब से एक परिवार को चलाने के लिए न्यूनतम 18000 रुपये प्रतिमाह की आवश्यकता होती है। अभी स्थिति यह है कि किसानों की वास्तविक आय में लगातार कमी आ रही।खेती किसानी को केन्द्र में रखकर कैसे स्वावलंबी गांव बने इस दिशा सर्वोदय समाज को विचार करना चाहिए।वहीं सुप्रसिद्ध गांधीवादी राधा भट्ट ने कहा कि वर्तमान विकास का मॅाडल तरह—तरह के खतरे पैदा कर रहा है। नीतियों के कारण विषमता की खाई बढ़ती जा रही है। गांधी ने काफी पहले इसे ही शैतानी सम्यता कहा था। एक विकल्प तलाशे जाने की जरूरत है।

सुप्रसिद्ध पर्यावरण विद् राजेन्द्र सिंह ने पानी के सवाल के उठाते हुए कहा कि मैनचेस्टर की लूट के विकल्प के रूप में गांधी ने चरखा पेश किया था। आज देश में आज पानी के नाम पर लूट मची हुई है।नदियां अतिक्रमण,शोषण और प्रदूषण का शिकार हैं। सर्व सेवा संघ जैसे संगठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्धा पवनार में दान नदी की स्थिति क्या है, कंपनीवाले क्या कर रहे हैं, इस पर आवाज नहीं उठी। अकाल और बाढ़ के क्षेत्रों में लगातार इजाफा हो रहा है।पानी के नाम चुनाव लड़े जा रहे हैं और लोग बेपानी हो रहे हैं। वहीं नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि गांधी ने ग्रामकोष की बात की,इसका मतलब सिर्फ हंडा रखना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की इको सिस्टम है।इसे उपयोग के रूप में लाना चाहिए, उपभोग के रूप में नहीं। अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना है। संघर्ष और काम करने के तरीके तय होने चाहिए। युवा की भागीदारी का मतलब है कि युवा छोटे—छोटे क्षेत्र में काम करें। उन्होंने कोकाकोला के खिलाफ केरल के प्राचीमाड़ा और राजातलाब के संघर्ष की चर्चा की। संघर्ष के क्षेत्र में सर्वोदय के कार्यकर्ता जाएं तथा आंदोलन को दिशा दें। चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी मनायी जा रही है, लेकिन चंपारण में भूमि का सवाल महत्वपूर्ण है। पंकज जैसे कार्यकर्ता दमन के शिकार बनते है। जमीन का अधिकार यहां के लोगों को नहीं मिला। धरतल के कार्य को व्यापकता से जोड़ना होगा। विकास के नाम पर सबसे ज्यादा हिंसा हो रही है।

सम्मेलन के दौरान  प्रख्यात गांधीवादी विचारक एसएन सुब्बाराव के सानिध्य में छात्राओं ने अनेकता में एकता भारत की विशेषता के तहत भारत के विभिन्न प्रांतों की भाषाओं का सजीव चित्रण भारत की संतान कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वहीं असम के आए प्रतिभागियों ने बिहु नृत्य और दूसरे प्रदेशों से आए सांस्कृतिक टोली ने विविधता में एकता की झलक पेश की।सम्मेलन की प्रस्तावना संयोजक आदित्य पटनायक ने रखी। सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियां और गांधी के विचार, युवाओं के विषय एवं गांधी विचार, स्त्री शक्ति् समस्याएं एवं समाधान,पर्यावरण का संकट एंव गांधी दृष्टि, गांव किसानों का संकट और स्वराज के रास्ते समाधान, रचनात्मक कार्यक्रम वर्तमान एंव भविष्य और हिंसा की समस्या तथा विश्व शांति के लिए सर्वोदय विषय पर गहन विमर्श किया गया तथा भावी कार्यक्रम तय किए गए।सेवाग्राम आश्रम से की गयी।सम्मेलन में यह गीत 1974 के आंदोलन का गीत जयप्रकाश का बिगुल बजा है, जाग उठी तरणाई है/ उठो जवानों, क्रांति द्वार पर तिलक लगाने आई है तो जरूर गुंजा, लेकिन उस समय से आज हालात ज्यादा जटिल हैं। ऐसे में युवाओं को कहां तक गांधीवादी सांचे और सर्वोदय के सांचे में ढ़ाल पाएंगे,यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा।

LEAVE A REPLY