लिव इन रिलेशन

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रेनू श्रीवास्तव          

लिव इन रिलेशन… इसको समझने से पहले आइये पहले हम इसका मतलब समझ ले।  इसका मतलब यह  है की कोई भी दो लोग एक लड़का और एक लड़की अपनी सहमति से बिना विवाह किये।  साथ र ह सकते है जिसको कानून ने भी सहमति दे दी है ये गैरकानूनी नहीं है. और इस तरह आप अपनी ज़िन्दगी के कुछ साल एक ऐसे  इंसान के साथ  बिता सकते है जिससे आप पसंद करते है या फिर ये  कहे के वो लोग जो अभी शादी के लिये तयार नहीं है और एक दूसरे को समझना चाहते है या आज़माना चाहते है  उनके साथी  उनके लिये जीवन बिताने योग्ये है या नहीं।  इसके कारन भी कई है कुछ लोग पहले अपना कैर्रिएर बनाने में इतने व्यस्त होते है की   वो अभी विवाह की ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकते इस रिलेशन में दोनों अपने अपने खर्ते खुद ही उठाते है न कोई बंधन न कोई ज़िम्मेदारी भला किसको परेशानी होगी इस तरह के रिलेशन में न अधिकार न ही कर्तव्य  अपनी ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से जीना हर चीज़ शेयर करना एक दूसरे की ज़रूरत को पूरा करना यही मकसद होता है नॉकरी या पढ़ाई भी और वैवाहिक सुख भी।सब साथ साथ ही चल रहा होता है न बदिशें घर वालो की न समाज की चिंता।   कहते है न शुरू में सब अच्छा ही लगता है मगर बाद में हर चीज़ बदल जाती है यही इसमे भी होता है लडकिया आज़ादी महसूस करने लगती है लड़के भी ज़िमेदारी से दूर रहते है बस मगर कई बार लोग इस तरह के संबंधों में अपने पुरे जीवन का बलिदान दे देते है  वो भूलने लगते है इसका अंत कहाँ होगा इस तरह के रिलेशन  मे कभी कभी लडकिया इमोशनल  हो जाती है और ये मान लेती है है के अब यही उनका हमसफ़र है और कभी कभी लड़के पूरा अधिकार रखने लगते है।  और कभी कभी दोनों ही एक दूसरे के दुश्मन बन जाते है और छुटकारा चाहने लगते है।  प्यार दोस्ती सब ख़त्म हो जाता है।  और अगर ऐसा नहीं भी हो तो अगर वो दोनों कुछ सालो बाद शादी भी केर लेते है तो वो शादी लंबी नहीं चल पाती क्योंकि पूराणा रोमांस खत्म हो चूका होता है सपनो की दुनिया से बहार आ चुके होते  ज़िमीदारिया भी बढ़  चुकी होती है फिर तो लगता है बस ज़िन्दगी की गाड़ी चल रही है उसमे कोई नयापन नहीं है वो छोटे छोटे सपने वो यांदे  जो कभी दोनों ने साथ बुने थे   अब वही डंक  मारने लगते  है जो कभी दोनों ने साथ देखे थे।  कहते है न अंत भला तो सब भला मगर इसमे तो अंत भला ही नहीं हो पाता घर वाले कभी उनका सम्मान नहीं कर पते समाज में भी कोई खास इज़्ज़त नहीं मिलती प्रेम कब का उड़ चूका होता है बस यही होता है अधिकतर इसमे फिर आजकल लोग इसकी तरफ इतने आकर्षित होते जा रहे है के पूछिये मत बस आज की युवा पीढ़ी बस अपने लिये ही जीना चाहती है लड़की भी कमाऊ मिल जाए और आपको बीवी का सुख भी दे।  लेकिन आज भी हमारा देश पुरुष  प्रधान ही है इस सौदे में घाटा  हमेशा लड़कियों का ही होता है क्योंकि न तो कहने के लिये वो बीवी होती है न ही दोस्त उनका एक मॉडर्न तरीके से शोषण ही हो रहा होता है मगर इतना पड़  लिख केर भी वो बहकावे में आ जाती है बस अपनी बुरी आदतो की वजह से ड्रिंक करना अपनी मर्जी के कपडे पहना अपनी शर्तो में जीना यही आज़ादी पसंद युवतियां अपने आप को इस तरह के रिलेशन में ले आती है और अपना ही नुकसान कर बैठती है तनाव थकन मानसिक पीड़ा यही सब उनके साथी बनने लगते है और जब तक वो इस तरह के अँधेरे से  बाहर आती है जब तक काफी देर हो चुकी  चरित्र के नाम पर  बदनाम हो चुकी होती है।  कई बार तो आत्महत्या जैसी स्थति तक का सामना करना पद जाता है।  क्योंकि वो इस रिश्ते में अपना सब कुछ खो चुकी  होती है. लड़के भी कई बार इसका शिकार होते है वो इतने दुब जाते है इस रिश्ते में के पूरा अधिकार रखना शुरू केर देते है अपने साथी पर  किसी से बात करनाशक करना,  शराब में दुब जाना यही सब उन्हें घेर लेता है तो इसमे भला  किसका हुआ शायद किसी का भी नहीं ये मरगतृष्णा है हो दूर से कुछ और  दिखाई देती है और असल में कुछ और। ..क्योंकि हम या हमारा समाज कितना भी मॉडर्न बन जाए  या अपने आप को मोर्डर्न मान ले मगर हम न चाहते हुई भी इमोशन के बहाव में बह ही जाते है हम इन्सान है खिलोने नहीं के जब तक मुद है खेल लिया बाद में दूसरा ले लेंगे। ..इस रिश्ते में कोई न कोई इमोशनल हो ही  जाता  है और फिर एक साथी इमोशनल  नहीं तो गाड़ी कैसे चलेगी  या फिर ज़्यादा दूर तक  नहीं चल पायेगी और तो और सबसे बड़ा नुक्सान ये होगा के दोनों को ही दुनिया से  से विश्वास उठ चूका होता है न फिर वो दोबारा किसी पैर भरोसा नहीं केर पाते और एक सच्चे प्यार को दूंदते रहते है।  शादी को तभी एक बंधन कहा गया है जिसमे लोग बंध जाते है और घर समाज की नज़रो में सम्मानित भी बने रहते है।  बेशक आजकल शादिया भी नहीं चल पा रही है उनमे भी दरारे  पड़ने लगी है मगर इतनी बुरी स्थति नहीं आती के लोग अपना जीवन ही समाप्त केर दे क्योंकि उन्हें जोड़े रखने के लिये संतान आ  जाती है जो उन्हें जोड़े रखती है जो एक परिवार का रूप ले लेती है।  कुछ समय के सुख के लिये क्या लाइव इन रिलेशन जैसा  ये रिश्ता बेहतर है एक वैवाहिक जीवन से।  …

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